ईरान की रेडियो व टीवी संस्था आईआरआईबी की विदेश सेवा के प्रमुख पैमान जिबिल्ली आजकल रूस के दौरे पर हैं। मॉस्को में उन्होंने रूसी संचार माध्यमों के अधिकारियों से भेंटवार्ता की है।
उन्होंने रशिया टूडे के प्रबंधक निदेशक से भेंट में रूसी और ईरानी संचार माध्यमों के मध्य सहकारिता में विस्तार को पश्चिमी संचार माध्यमों के वर्चस्व की समाप्ति की दिशा में प्रभावी कदम बताया।
जिबिल्ली ने इस भेंटवार्ता में ईरान की विदेश सेवा के फेसबुक और ट्वीटर एकाउंट को बंद किये जाने की ओर संकेत के साथ बल देकर कहा कि इसी प्रकार की कार्यवाही रूसी संचार माध्यमों के विरुद्ध भी की गयी है और तेहरान- मॉस्को एक दूसरे से सहकारिता को मज़बूत करके इस प्रकार की कार्यवाहियों का मुकाबला कर सकते हैं।
रशियाटूडे के प्रबंधक निदेशक ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में अमेरिका और यूरोप के दोहरे मापदंड की आलोचना करते हुए कहा कि रूसी संचार माध्यमों से संबंधित सोशल साइटों को बंद करना रशियाटूडे की गतिविधियों को रोकने हेतु पश्चिम की कार्यवाहियों का एक भाग है।
संचार माध्यमों की दुनिया में पश्चिमी संचार माध्यम दुनिया के जिस क्षेत्र में चाहते हैं एकाधिकार से काम ले रहे हैं। पश्चिमी संचार माध्यम अपने लक्ष्यों को साधने के लिए ध्यान योग्य खबरों और तस्वीरों को तोड़- मरोड़कर पेश करते हैं ऐसी स्थिति में पश्चिमी संचार माध्यमों के एकाधिकार का मुकाबला करने के लिए ईरानी और रूसी संचार माध्यमों के मध्य एक आवश्यकता बन गयी है।
संचार माध्यम विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में संबोधकों की जानकारी की सतह को अधिक करने, स्वतंत्र उद्देश्यों को व्यवहारिक बनाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के प्रति कटिबद्ध रहने के लिए स्वतंत्र समाचार एजेन्सियों के मध्य समान दृष्टिकोण उत्पन्न किया जाना चाहिये। इस दृष्टि से ईरान और रूस केन्द्रीय भूमिका निभा सकते हैं।
समाचार के क्षेत्र में दोनों देशों के संचार माध्यमों के मध्य सहकारिता और घटनाओं व परिवर्तनों के संबंध में पारदर्शी विश्लेषण दुनिया के बहुत से लोगों को वास्तविकता से अवगत करा सकते हैं।
ईरानी और रूसी संचार माध्यमों के अंदर इस बात की क्षमता मौजूद है कि वे द्विपक्षीय प्रयास से सहकारिता की सतह को बेहतर बना सकते हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में रशियाटूडे और प्रेसटीवी और दूसरे संचार माध्यम एक दूसरे से सहकारिता कर रहे हैं और इस सहकारिता को अनुभवों के आदाऩ- प्रदान और तकनीक में विस्तार सहित विभिन्न क्षेत्रों में विस्तृत किया जा सकता है।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इस उद्देश्य को प्राप्त करना दोनों देशों के मध्य मौजूद संभावनाओं, विशेषज्ञों और मेधावी लोगों से लाभ उठाने पर निर्भर है।